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भारत सरकार का बड़ा ऐलान: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए 24 विधानसभा सीटें सुरक्षित!

क्या पाकिस्तान को दिया जाएगा करारा जवाब? भारत सरकार का ऐतिहासिक फैसला!

भारत सरकार ने पाकिस्तान को एक बार फिर झटका देते हुए 24 विधानसभा सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के लिए सुरक्षित करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक(bill), 2023 पेश करते हुए यह घोषणा की।

कैसे हुआ यह फैसला?

मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था। उसके बाद केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर का दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजन कर दिया था। अब इस नए फैसले के तहत जम्मू और कश्मीर विधानसभा की सीटों को 107 से बढ़ाकर 114 कर दिया गया है। इसमें से 43 सीटें जम्मू क्षेत्र के लिए, 47 सीटें कश्मीर घाटी के लिए और 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए सुरक्षित रखी गई हैं।

भारत का मजबूत संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का यह फैसला पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हम इसे वापस लेने के लिए दृढ़ हैं।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह फैसला एकतरफा और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि “इस फैसले से कश्मीर में अशांति बढ़ेगी।”

FAQ:

  1. क्या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों को इन सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार होगा?

नहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों को इन सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा। इन सीटों को केवल उसी समय भरा जाएगा जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत में शामिल हो जाएगा।

  1. इस फैसले से क्या फायदा होगा?

इस फैसले से यह संदेश जाएगा कि भारत सरकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के लिए दृढ़ है। साथ ही, यह कश्मीरी लोगों को यह विश्वास दिलाएगा कि भारत उनका समर्थन करता है।

  1. क्या इस फैसले से कश्मीर में अशांति बढ़ेगी?

विपक्ष का कहना है कि इस फैसले से कश्मीर में अशांति बढ़ेगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि इस फैसले से शांति बहाली में मदद मिलेगी।

इस फैसले के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। यह भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को और भी खराब कर सकता है। लेकिन यह कश्मीरी लोगों को स्वतंत्रता और न्याय दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी हो सकता है।

आप इस ऐतिहासिक फैसले के बारे में क्या सोचते हैं? हमें कमेंट में बताएं!

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