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TATA SECRET: क्या ये है टाटा ग्रुप के असली पैसे का राज ?

दुनिया के हर बड़े उद्योगपति के जीवन में कई सफलताएं और कुछ अनकहे राज होते हैं। भारत के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के मामले में भी यही कहा जा सकता है। जहां उनकी टाटा ग्रुप की कंपनियां हर किसी को पता हैं, वहीं एक गुप्त कंपनी भी उनके साम्राज्य का हिस्सा है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आइए उठाते हैं इस कंपनी से जुड़े परत को और जानते हैं टाटा के इस छिपे हुए रहस्य के बारे में!

कौन सी है वो “गुप्त” कंपनी?

यह गुप्त कंपनी है – “सर दोराबजी जमशेदजी ट्रस्ट (एसडीजे ट्रस्ट)”. 1937 में स्थापित, यह भारत के सबसे पुराने और सबसे धनी धर्मार्थ ट्रस्टों में से एक है। टाटा समूह की स्थापना के पीछे यही ट्रस्ट भी एक प्रमुख संस्थापक था। हालांकि, यह ट्रस्ट कभी भी सीधे तौर पर किसी व्यावसायिक गतिविधि में शामिल नहीं रहा है, लेकिन इसका टाटा समूह के विकास में अहम योगदान रहा है।

कैसे काम करता है एसडीजे ट्रस्ट?

एसडीजे ट्रस्ट अपने पास रखी गई टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों के लाभांश से होने वाली आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और कला जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं को संचालित करने के लिए करता है। ट्रस्ट द्वारा संचालित कुछ प्रमुख पहल में शामिल हैं:

  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर): दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों में से एक है।
  • टाटा मेमोरियल अस्पताल: मुंबई का एक प्रसिद्ध चिकित्सा संस्थान, जो उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है।
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस): भारत के प्रमुख सामाजिक विज्ञान संस्थानों में से एक है।
  • नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए): भारत का शीर्ष प्रदर्शन कला केंद्र है।

एसडीजे ट्रस्ट का महत्व

एसडीजे ट्रस्ट न केवल जरूरतमंदों की मदद करता है, बल्कि भारतीय समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ट्रस्ट द्वारा संचालित परियोजनाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार लाती हैं और देश के विकास को गति देती हैं। इसके अलावा, ट्रस्ट एक उदाहरण स्थापित करता है कि कैसे बड़े उद्योग समूह सामाजिक कल्याण में योगदान दे सकते हैं।

क्यों छिपा रहता है एसडीजे ट्रस्ट?

एसडीजे ट्रस्ट को गुप्त नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह निश्चित रूप से टाटा ग्रुप के व्यावसायिक कार्यों से अलग पहचान रखता है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण में योगदान करना है, न कि लाभ कमाना। इसीलिए यह अपनी गतिविधियों को कम प्रचार-प्रसार के साथ संचालित करता है।

निष्कर्ष :

हालांकि रतन टाटा अपने उद्योगपति के व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं, लेकिन एसडीजे ट्रस्ट का उदाहरण उनकी उदारता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह ग़ुफ्त कंपनी न केवल जरूरतमंदों की मदद करती है, बल्कि भारत के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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