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Mahua Moitra: क्या सांसद महुआ मोइत्रा को ‘कैश फॉर क्वेरी’ विवाद के चलते सदन से निकाला जाना उचित है?

Mahua Moitra: महुआ मोइत्रा का नाम आजकल सुर्खियों में है और इसका कारण है उनका कथित ‘Cash for query’ विवाद. उनपर आरोप है कि उन्होंने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से पैसे लेकर संसद में सवाल उठाए, जिससे उन्हें गलत लाभ हुआ. लोकसभा की Ethics Committee ने इस मामले की जांच के बाद उन्हें सदन से निकालने की सिफारिश की है. इस फैसले से देशभर में बहस छिड़ी हुई है कि क्या यह फैसला सही है या गलत?

क्या है मामला?

दर्शन हीरानंदानी ने एक एफिडेविट में दावा किया है कि उन्होंने महुआ मोइत्रा को 5 करोड़ रुपये दिए थे, जिससे उन्होंने संसद में अडानी ग्रुप के खिलाफ सवाल उठाए. उनका कहना है कि मोइत्रा ने उन्हें अपना सांसद पोर्टल का लॉगिन और पासवर्ड भी दिया था, जिससे उन्होंने खुद सवालों को अपलोड किया था. मोइत्रा ने इन आरोपों को झूठा बताया है और कहा है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है.

Ethics Committee की सिफारिश

लोकसभा की Ethics Committee ने इस मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोइत्रा ने अपने सांसद होने के दायित्वों का उल्लंघन किया है. उन्होंने अपने लॉगिन और पासवर्ड को अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा किया और उनके द्वारा दिए गए सवालों को संसद में उठाया. कमेटी ने उन्हें अवैध लाभ होने के लिए भी दोषी पाया है. इसलिए, कमेटी ने उन्हें लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश की है.

संसद में बहस

Ethics Committee की रिपोर्ट पर 8 दिसंबर को लोकसभा में बहस हुई. भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और मोइत्रा को सदन से निकालने की मांग की. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने मोइत्रा का बचाव किया और कहा कि उनके खिलाफ आरोप बेबुनियाद हैं. अंत में, लोकसभा ने एक प्रस्ताव पारित करके मोइत्रा को सदन से निष्कासित कर दिया.

विवाद का क्या मतलब है?

महुआ मोइत्रा का मामला कई सवालों को उठाता है. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सांसदों को पैसा लेकर संसद में सवाल उठाना चाहिए? क्या इससे संसद की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचती? दूसरा सवाल यह है कि क्या Ethics Committee का फैसला सही है? क्या मोइत्रा को बिना किसी ठोस सबूत के ही सदन से निकाल देना उचित है?

इस विवाद का एक बड़ा पहलू यह भी है कि किस तरह से राजनीति में पैसा हावी हो गया है. क्या अब सांसद भी पैसा लेकर अपना कर्तव्य भूल जाते हैं? क्या इससे लोकतंत्र की नींव को खतरा नहीं है?

निष्कर्ष

महुआ मोइत्रा का मामला एक गंभीर मुद्दा है. इस मामले पर देशभर में बहस होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में इस तरह के मामले न हों. संसद में पैसा और भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए. सांसदों को अपना कर्तव्य ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ निभाना चाहिए, ताकि देश की जनता का विश्वास उनके ऊपर बना रहे.

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